कचौड़ी
कचौड़ी भारत का एक लोकप्रिय और परंपरागत स्नैक है, जिसे मसालेदार भरावन और कुरकुरी सुनहरी परत के लिए जाना जाता है। उत्तर भारत, राजस्थान, मध्यप्रदेश से लेकर बंगाल और बिहार तक इसके अलग-अलग रूप और स्वाद मिलते हैं। कई जगह इसे त्योहारों, मेलों और खास अवसरों पर बनाना शुभ माना जाता है।
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| नाम | कचौड़ी |
| व्यंजन प्रकार | स्नैक / नाश्ता |
| मुख्य सामग्री | मैदा, मसालेदार दाल या आलू की भरावन |
| लोकप्रिय क्षेत्र | उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, बिहार |
| स्वाद | मसालेदार, कुरकुरा |
| परोसा जाता है | दही, मीठी चटनी, हरी चटनी, आलू की सब्ज़ी |
| प्रमुख प्रकार | मूंग दाल कचौड़ी, प्याज़ कचौड़ी, राजस्थानी कचौड़ी, बंगाली राधाबल्लभी, राज कचौरी, कोटा कचौरी, मावा कचौरी |
| त्योहार / अवसर | दिवाली, होली, तीज, खास पारिवारिक समारोह |
| परोसने का तापमान | गर्म |
परिचय
कचौड़ी एक ऐसा व्यंजन है जिसने सदियों से भारतीय रसोई में अपनी खास जगह बनाई है। इसका स्वाद उस क्षेत्र की परंपराओं और मसाला-संस्कृति को दर्शाता है जहाँ यह बनाया जाता है। राजस्थानी कचौड़ी अपने तीखे और तेज़ मसाले के लिए प्रसिद्ध है, जबकि उत्तर भारत में इसे हल्के मसालों के साथ दही-चटनी के साथ परोसा जाता है। कई परिवारों में कचौड़ी को “त्योहार का नाश्ता” माना जाता है।
उत्पत्ति और इतिहास
कचौड़ी की सही उत्पत्ति का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता, लेकिन भोजन इतिहासकारों के अनुसार इसका संबंध प्राचीन उत्तर भारत से माना जाता है। कहा जाता है कि यह व्यंजन मौरी, गुप्त और मगध काल की रसोई में भी किसी न किसी रूप में मौजूद था।
मध्यकाल में व्यापारिक रास्तों के फैलाव के साथ कचौड़ी कई क्षेत्रों में पहुँची और हर स्थान ने अपने स्वाद और मसालों के आधार पर इसे नया रूप दिया। राजस्थान में कोटा, अजमेर और जोधपुर की कचौड़ी आज भी बाहर से कुरकुरी और अंदर से मसालेदार स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।
कचौड़ी के प्रमुख प्रकार
1. मूंग दाल कचौड़ी
सबसे लोकप्रिय रूप। भीगी मूंग दाल को मसालों के साथ भूनकर भरावन बनाई जाती है। बाहर की परत मोटी और कुरकुरी होती है।
2. राजस्थानी कचौड़ी (कोटा/अजमेर)
बहुत तीखी और मसालेदार। अक्सर दही और कढ़ी के साथ परोसी जाती है।
3. प्याज़ कचौड़ी
इसकी भरावन प्याज़, सौंफ, धनिया और मिर्च से बनी होती है। कोटा की प्याज़ कचौड़ी पूरे भारत में प्रसिद्ध है।
4. आलू कचौड़ी
उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में प्रचलित। अंदर आलू की मसालेदार भरावन।
5. राधाबल्लभ (बंगाल)
दाल की भरावन के साथ एक मीठी-हल्की सब्ज़ी परोसी जाती है।
6. खस्ता कचौड़ी
धीमी आँच पर तली जाती है, परत flaky और बहुत कुरकुरी होती है।
कचौड़ी बनाने की विधि (Recipe)
यह रेसिपी सामान्य घरेलू स्वाद पर आधारित है।
सामग्री
आटा बनाने के लिए
- मैदा – 2 कप
- तेल/घी – 4 बड़े चम्मच
- नमक – स्वादानुसार
- पानी – आवश्यकतानुसार
भरावन के लिए (मूंग दाल कचौड़ी)
- मूंग दाल – ¾ कप (भीगी हुई)
- जीरा – ½ चम्मच
- सौंफ – ½ चम्मच
- धनिया पाउडर – 1 चम्मच
- लाल मिर्च – ½ चम्मच
- अमचूर – ½ चम्मच
- हींग – एक चुटकी
- नमक – स्वादानुसार
- तेल – 1 बड़ा चम्मच
तलने के लिए
- तेल – आवश्यकतानुसार
विधि
आटा तैयार करना
- मैदा में नमक और घी मिलाकर हाथों से मोयन बनाएं।
- हल्का सख्त आटा गूँथकर 10–15 मिनट ढककर रखें।
भरावन तैयार करना
- दाल का पानी निकालकर दरदरी पीस लें।
- कड़ाही में तेल गरम करके जीरा, सौंफ और हींग डालें।
- अब पिसी दाल डालकर अच्छी तरह भूनें।
- मसाले, नमक और अमचूर मिलाकर 5–6 मिनट पकाएं।
- भरावन ठंडी होने दें।
कचौड़ी तलना
- आटे की छोटी लोई बनाएं।
- हल्का सा बेलें और बीच में भरावन रखें।
- किनारों को बंद करके फिर से हल्का सा बेलें।
- गर्म तेल में धीमी आँच पर सुनहरा होने तक तलें।
परोसने के तरीके
- खट्टी-मीठी इमली की चटनी
- पुदीना हरी चटनी
- दही के साथ
- आलू की सब्जी
- राजस्थान में – कढ़ी के साथ
- बिहार/UP में – जलेबी के साथ (सुबह के नाश्ते के रूप में)
पोषण तथ्य (Nutrition Facts)
(लगभग 1 कचौड़ी के अनुसार — अनुमानित)
| तत्व | मात्रा |
| कैलोरी | 150–220 kcal |
| कार्बोहाइड्रेट | अधिक |
| वसा | मध्यम से अधिक |
| प्रोटीन | कम-मध्यम |
| फाइबर | भरावन पर निर्भर |
नोट: डीप-फ्राई होने के कारण कैलोरी थोड़ी अधिक होती है।
संस्कृति व परंपरा में कचौड़ी
- कई उत्तर भारतीय घरों में त्योहार या मेहमानों के लिए कचौड़ी बनाना शुभ माना जाता है।
- राजस्थान में त्योहारों पर खस्ता कचौड़ी सुबह-सुबह बनती है।
- कुछ जगह कचौड़ी को शादी-समारोह के नाश्ते का अनिवार्य हिस्सा माना जाता है।
- बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे सुबह की चाय के साथ खाया जाता है।
कचौड़ी से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)
कचौड़ी और करंजी/गुजिया में क्या अंतर है?
कचौड़ी नमकीन होती है, जबकि करंजी/गुजिया मीठी होती है।
कचौड़ी को कुरकुरा कैसे बनाएं?
आटे में मोयन (घी/तेल) सही मात्रा में डालना और धीमी आँच पर तलना सबसे महत्वपूर्ण है।
क्या कचौड़ी बेक की जा सकती है?
हाँ, कई लोग हेल्दी विकल्प के रूप में ओवन में 180°C पर 20–25 मिनट बेक करते हैं।
कौन-कौन सी दाल से कचौड़ी बनती है?
मूंग दाल, उड़द दाल, चना दाल — क्षेत्र के अनुसार बदलता है।
संबंधित व्यंजन
- समोसा
- खस्ता कचौड़ी
- राधाबल्लभ (बंगाली)
- आलू पूड़ी
- कचौड़ी-चाट
समापन
कचौड़ी केवल एक नाश्ता नहीं, बल्कि भारतीय खान-पान की विविधता और परंपरा का एक सुन्दर उदाहरण है। हर जगह इसका स्वाद, मसाले और बनाने का तरीका अलग होता है, और यही इसे खास बनाता है।




