रेगिस्तान में पाए जाने वाले पेड़ पौधों के नाम जानिए 

बहुत से ऐसे पेड़ पौधों है जो राजस्थान के रेगिस्तान में पाए जाते हैं इसलिए यदि आप रेगिस्तान में पाए जाने वाले पेड़ पौधों के नाम नहीं जानते हैं तो इस लेख को पूरा पढ़े, आपकों रेगिस्तानी वनस्पतियां के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी.

रेगिस्तान में सुखा और शुष्क परिस्थितियों के कारण, बहुत से लोग यह समझते हैं कि रेगिस्तान (Desert) जीवित चीजों और विशेष रूप से पेड़ पौधों के लिए सही जगह नहीं है.

जैसे कि आपकों पता है रेगिस्तान के इलाके में पानी की कमी के कारण ऐसा प्रतीत होता है कि रेगिस्तान जीवित चीजों के बढ़ने के लिए एक बहुत ही कठिन जगह है.

जो पेड़ पौधों मरुस्थल या रेगिस्तान में पाए जाते हैं वे जलवायु के अनुसार स्वयं को ढाल लेते हैं. हालांकि, ऐसे कई पेड़ पौधे हैं जो विशेष रूप से रेगिस्तान में ही रहते हैं.

रेगिस्तानी पौधे गर्म तथा शुष्क वातावरण में पनपते हैं जहाँ वे न्यूनतम वर्षा होने के बावजूद भी जीवित रह सकते हैं. यही कारण है कि ऐसे पौधों ज़्यादातर मरुस्थलीय स्थानों में ख़ास देखने को मिलता है.

उच्च तापमान और थोड़ी नमी होने के कारण यहां पर विकसित होने वाले पौधों को अपनी मांसल पत्तियों में नमी जमा करने या एक व्यापक जड़ प्रणाली रखने की आवश्यकता होती है.

पेड़ पौधों बहुत से है जो मरुस्थलीय जगहों के लिए खासतौर पर होते हैं. इसलिए यदि आपकों रेगिस्तान में पाए जाने वाले पेड़ पौधों के नाम के बारे में जानकारी नहीं है तो इस लेख में इस सवाल का जवाब मिल जाएगा.

रेगिस्तानी वनस्पतियां क्या है?

रेगिस्तान के उच्च तापमान और थोड़ी नमी वाले शुष्क क्षेत्रों के वातावरण में उगने वाले पेड़ पौधों को रेगिस्तानी वनस्पतियां कहा जाता है.

यहां पर पाए जाने वाले वनस्पतियां पानी अक्सर अपने ऊतकों या खोखले केंद्र में जमा करते हैं. रेगिस्तानी इलाके में जब भारी मौसमी वर्षा होती है तब मरुस्थलीय पौधे अंकुरित होने का काम लगाते हैं.

बाद में वे सभी पेड़ पौधों मरुस्थलीय जगहों के जीव जंतु के लिए जीवन प्रदान करते हैं और साथ ही जो मनुष्य रेगिस्तान के क्षेत्रों में रहते हैं उनका भी जीवन जीने के लिए उपयुक्त सभी चीजें प्रदान करते हैं जैसे कि ऑक्सीजन, हवा, वर्षा कराने में मदद करना आदि.

रेगिस्तान में पाए जाने वाले पेड़ पौधों के नाम

रेगिस्तान में पाए जाने वाले पेड़ पौधों के नाम

भारत में रेगिस्तानी पौधे आपकों मुख्यतः राजस्थान (Rajasthan) के मरुस्थलीय इलाके में देखने को मिलते हैं जो अपने आप में प्राकृतिक रूप से बहुत सुन्दर दृश्य प्रदान करते हैं. ये सभी पेड़ पौधे रेगिस्तान की कठोरता और चरम सीमा के अनुकूल होने के लिए दृढ़ता से बनाए रहते हैं.

यहाँ हमने रेगिस्तानी पौधों की सूची दी हैं जो मुख्य रूप से मरुस्थलीय पौधे या रेगिस्तानी वनस्पतियां के नाम से जाना जाता है जो कुछ इस प्रकार है :

1. बबूल (Acacia)

बबूल का पेड़ बहुत ही गुणकारी माना जाता है जिसे भारत में पूजनीय के रूप में देखा जा सकता है. इन पेड़ों की आकार माध्यम होता है तथा छोटी पत्तियां होती हैं.

बबूल पर छोटे-छोटे पीले फूल व हरी फलियाँ लगती हैं जो औषधि और अन्य कई कमों के लिए उपयोगी माना जाता है. इसकी कुछ प्रजातियों के नाम कुछ इस प्रकार है :

  • खेर
  • करील
  • सोनकीकर
  • फुलाई
  • रामबबूल

2. पलाश

पलाश एक ऐसा पेड़ है जिसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं यहीं कारण है कि इसे “जंगल की आग” भी कहा जाता है. इस पेड़ को पलास,छूल,परसा, ढाक, टेसू, किंशुक, केसू आदि नामों से भी जाना जाता है.

प्राचीन काल से ही होली के रंग इसके फूलो से तैयार किये जाते रहे है और भारत भर में इसे जाना जाता है.

इनमें पाए जाने वाले “लता पलाश” दो प्रकार के होते हैं. एक तो लाल पुष्पो वाला और दूसरा सफेद पुष्पो वाला. लाल फूलो वाले पलाश का वैज्ञानिक नाम ” ब्यूटिया मोनोस्पर्मा ” होता है और वहीं सफेद पुष्पो को औषधीय के लिए उपयोग किया जाता है जिसका वैज्ञानिक नाम ” ब्यूटिया पार्वीफ्लोरा ” है.

3. झरबेला

इसे झड़बेर भी कहते हैं जिसका वैज्ञानिक नाम जिजिफस नमुलिरिया (Zizyphus nummularia) होता है. यह रैमनेसिई कुल का पौधा है. झरबेला की अनुपर्ण (stipul) काँटेदार होते हैं और फूल छोटे, सफेद तथा शीत ऋतु के प्रारंभ में सितंबर अक्टूबर तक पाए जाते हैं.

साथ ही इसपर कांटे भी पाए जाते हैं और लगने वाले बेर सामान फल खाने योग्य होते हों.

4. मदार

मदार एक औषधीय पादप है जिसे  मंदार’, आक, ‘अर्क’ और अकौआ भी कहते हैं. बड़े व मोटे पत्तों वाला यह वृक्ष छोटा और छत्तादार होता है.

इसका फूल सफेद छोटा छत्तादार होता है और पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं. आक की शाखाओं से दूध निकलता है जो जहर समान होता है, और जिसका सेवन करने से मौत भी हो सकती है.

आक रेगिस्तानी इलाके में ज़्यादातर देखने को मिलता है क्योंकि यह पेड़ अधिक पानी बरसने पर सूख जाता है. इसका उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में काफ़ी किया जाता है इसलिए यह एक इंपोर्टेंट रेगिस्तानी पौधा है.

5. गोरख इमली

इसे “गोरखचिंच” व “बाओबाब” भी कहते है जिसका वैज्ञानिक नाम ऐडैनसोनिया डिजिटेटा (Asansonia digitata) होता है. यह मैलवेसिई कुल का पौधा है. यह मोटे तने वाला बड़ा पेड़ है, जिसमें फूल वर्षा ऋतु में लगता है.

यह आधी रात के समय फूलता है तथा दूसरे दिन तक मुरझा जाता है और इसके फूल एक बड़े डंठल से लटकता रहता है और उसमें सफेद पंखुड़ियाँ होती है.

इस पेड़ पर फूल के अलावा फल भी लगते हैं जिसे खाने के साथ साथ औषधि भी बनाई जाती है.

6. खेजड़ी

खेजड़ी को शमी का वृक्ष, कांडी, जांटी, सांगरी भी कहा जाता है. यह पौधा बहुत ही पवित्र माना जाता है जिसे स्थानीय लोग पूजा-अर्चना भी करते हैं. इसकी ऊंचाई 8-10 मीटर तक होती है.

यह मुख्यतः थार के मरुस्थल एवं अन्य स्थानों में पाया जाता है जो बहुत ही काम का पेड़ है.

7. अमलतास

इसका वैज्ञानिक नाम कैसिया फिस्चुला (Cassia fistula) है जो लेग्यूमिनोसी (Legnminoseae) तथा सीजैल्पिनियाडिई (Caesalpinioideae) कुल का पौधा है.

पेड़ की अधिक उचाई नहीं होती है. इसमें पीले पीले फूल मार्च या अप्रैल माह में लगते हैं. यह पूरा पेड़ गुणों से युक्त है, जो बहुत ही काम का पेड़ होता है, जिसका इस्तेमाल आयुर्वेद चिकित्सा व औषधि के निर्माण में विभिन्न तरीकों से किया जाता है.

8. छोटी दुद्धी

इसे युफोर्बिया भी कहा जाता है जो तुरंत खुन को बंद कर देता है जिसे केवल आपातकालीन स्थिति में ही उपयोग किया जाता है. सुन्दर रंग-बिरंगे फूलों वाला इस पौधे का उपयोग सजावट और अन्य कार्यों के लिए भी किया जाता है.

इसके पौधे की अधिक देखभाल की जरूरत नहीं होती है. इसे एक बार लगाने के बाद यह अपने आप ग्रो करने लगता है.

9. वोल्लेमी

छोटी पत्तियां गहरे हरे रंग की इस पौधे की ऊंचाई 25-40 मीटर होती है. इसकी पत्तियाँ डेढ़ से तीन इंच तक लम्बी व सपाट होती हैं. देखने में यह कुछ क्रिसमस ट्री जैसा दिखता है.

इसके छोटे पेड़ों को गमलों में सजावट के लिए लगाया जाता है. इस तरह के पेड़ों की जीवन काल बहुत अधिक होती है जो कम पानी में भी रह सकते हैं.

10. कैक्टस

कैक्टस (cactus) जिसे नागफ़नी भी कहा जाता है जो अपने मोटे, फूले हुए तनों में पानी बटोरकर शुष्क व रेगिस्तानी परिस्थितियों में जीवित रहने और अपने कांटों से भरे हुए रूप के लिए जाना जाता है.

कैक्टस की कई प्रजातियां पाई जाती है जिनमें से सबसे छोटी प्रजाति “फिशहूक कैक्टस” है जिसकी लंबाई लगभग 3 इंच के बराबर होती है. कुछ ऐसे कैक्टस की प्रजातियां हैं जिन पर फूल भी खिलते हैं लेकिन सभी पौधे फूलदार नहीं होते.

इन्हें भी पढ़े

1. रेगिस्तान में पैदा होने वाले पेड़-पौधों को क्या बोलते हैं?

रेगिस्तान तथा मरुस्थलीय जगहों में पैदा होने वाले पेड़-पौधों को मरुद्भिद बोलते हैं.

2. रेगिस्तान में कौन से पेड़ पाए जाते हैं?

रेगिस्तान में अनेक प्रकार की पेड़ पौधे पाए जाते हैं जैसे कि कैक्टस, बबूल, पलाश, झरबेला, मदार, आदि.

3. रेगिस्तान में पेड़ पौधे कम क्यों होते हैं?

रेगिस्तान में पेड़ पौधे कम इसलिए होते हैं क्योंकि यहां की जमीन रेतीले होते हैं. तापमान अधिक होता और वर्षा नहीं के बराबर होती है.

इस लेख में

इस लेख में आपकों रेगिस्तान में पाए जाने वाले पेड़ पौधों के नाम के बारे में जानकारी दी है. यदि आप मरुस्थलीय जगहों पर कौन कौन से पेड़ पौधे होते हैं के बारे में नहीं जानते हैं तो इस में इन्ही सभी के बारे में बतलाया गया है.

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