राजनीति विज्ञान के जनक कौन है और क्यों?

क्या आपकों पता है राजनीति विज्ञान के जनक कौन है? यानी राजनीतिशास्त्र के पिता किसे कहा जाता है (Father of Political Science in Hindi) और उनका नाम क्या है?

राजनीति विज्ञान (Political Science) या राजनीतिशास्त्र अत्यन्त प्राचीन विषय है. यह वह विज्ञान है जो एक छात्र को राज्य, वैश्विक राजनीति और सरकार के बारे में सिखाती है.

इसमें राजनीतिक दर्शन, राजनीतिक विचारधारा, राजनीतिक चिन्तन, संस्थागत या संरचनागत ढाँचा, राजनीतिक सिद्धान्त, लोक प्रशासन, अन्तरराष्ट्रीय कानून, संगठन और तुलनात्मक राजनीति आदि तमाम बातें शामिल होती है.

यदि आप राजनीति विज्ञान के छात्र है और इस विषय को अपने स्कूल या कॉलेज में अध्ययन कर रहे हैं तो आपकों राजनीति विज्ञान के जनक किसे कहा जाता है (rajniti vigyan ke janak) के बारे में जरूर जानना चाहिए.

राजनीति विज्ञान के जनक कौन है? (Father of Political Science in Hindi)

राजनीति विज्ञान के जनक कौन है

राजनीति विज्ञान के जनक अरस्तू को कहा जाता है, जो एक यूनानी दार्शनिक और प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु थे.

उनका जन्म 384 ईपू में स्टेगेरिया नामक नगर में हुआ था. उन्होंने भौतिकी,जीव विज्ञान, राजनीति शास्त्र, नीतिशास्त्र,तर्कशास्त्र, आध्यात्म, कविता, संगीत, नाटक सहित कई विषयों पर रचना की.

अरस्तू ने अलग अलग विषयों पर कई रचनाएं की थी, जिसमें बहुत से नष्ट हो गई. उनके द्वारा लिखी राजनीति पर प्रसिद्ध ग्रंथ का नाम ‘पोलिटिक्स’ है, जिससे आधुनिक राजनीति विज्ञान का विकास हुआ है. इस प्रकार उन्हें राजनीति विज्ञान का पितामह कहा जाता है.

अरस्तू (राजनीति विज्ञान के जनक)

राजनीति विज्ञान के जनकअरस्तू
जन्म 384 ईपू, स्टैगिरा, ग्रीस
मृत्यु322 ईसा पूर्व, यूबोआ द्वीप, ग्रीस
राष्ट्रीयताग्रीक
शिक्षाप्लेटोनिक एकेडमिक
प्रसिद्ध राजनीति विज्ञान के जनक या पिता

अरस्तू को राजनीति विज्ञान के जनक क्यों कहा जाता है?

अरस्तू को राजनीति विज्ञान का जनक इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने आदर्श राज्य, गुलामी, क्रांति, शिक्षा, नागरिकता, सरकार के रूपों, संविधान के सिद्धांत आदि विषयों पर विस्तार से दुनिया को बताया.

उन्होंने कहा एक आदमी को अपने परिवेश और पर्यावरण को जानने के लिए ये विषय आवश्यक हैं. उन्होंने ऐसे कई राजनीतिक मामलों और विचारधारा को बताया इसलिए उन्हें राजनीति विज्ञान का जनक माना जाता है.

अरस्तू को राजनीति विज्ञान के जनक है क्योंकि :

  1. राजनीति विज्ञान को स्वतंत्र विज्ञान की गरिमा प्रदान की
  2. विषय के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाना
  3. सरकार के अंगों का निरूपण
  4. यथार्थवादी विचारक होना
  5. कानून की सर्वोच्चता का प्रतिपादन करना
  6. वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाना जैसे कि आगमनात्मक और तुलनात्मक
  7. राज्य के पूर्ण सिद्धांत को प्रस्तुत करना

प्लेटो को राजनीति विज्ञान के जनक क्यों नहीं कहा जाता है?

अरस्तू प्लेटो का शिष्य है फ़िर भी प्लेटो को राजनीति विज्ञान के जनक नहीं माना जाता है क्योंकि :

  1. प्लेटो के द्वारा राजनीति विज्ञान को स्वतंत्र विज्ञान का दर्जा प्रदान नहीं किया गया. वह इसे नीतिशास्त्र का ही अंग मानता था. वही अरस्तू ने नीतिशास्त्र और राजनीतिशास्त्र में अन्तर किया और राजनीतिशास्त्र को एक स्वतंत्र विज्ञान की गरिमा प्रदान की.
  2. प्लेटो का विचार पद्धति सर्वभौमिक स्वरूप का दर्शन है वही अरस्तू का विचार पद्धति व्यक्तिगत पदार्थ का दर्शन है.
  3. प्लेटो कल्पनावादी है, अरस्तू यथार्थवादी.
  4. प्लेटो की पद्धति निगमनात्मक है जबकि अरस्तू का आगमनात्मक है.
  5. प्लेटो की शैली काव्यात्मक है जबकि अरस्तू की गध्यात्मक है.
  6. प्लेटो का दर्शन “चाहिए” (Should) पर आधारित है जबकि अरस्तू की “है” (Is) पर आधारित है.
  7. प्लेटो का सिद्धांत क्रमबद्ध नहीं है, अरस्तू का क्रमबद्ध है.
  8. प्लेटो केवल सरकार के विभिन्न स्वरूपों का उल्लेख किया जबकि अरस्तू ने सरकार के अंगों के बारे में बताया.

राजनीति विज्ञान की स्थापना किसने की थी?

अरस्तू ने राजनीति विज्ञान की स्थापना की जो राजनीति विज्ञान की कार्यशील परिभाषा देने वाले पहले लोगों में से एक थे.

राजनीति शास्त्र को अंग्रेजी में क्या कहते हैं?

राजनीति शास्त्र को अंग्रेजी में ‘Politics’ कहा जाता है.

राजनीति की शुरुआत कब हुई?

राजनीति की शुरुआत रामायण काल से भी अति प्राचीन है. पुराने महाकाव्य में से एक महाभारत में इसका सर्वाधिक विवरण देखने को मिलता है, जिसमें राजनीति के कई पहलुओं से रूबरू होंगे जैसे कि चक्रव्यूह रचना या चौसर खेल में पाण्डवों को हराने कि राजनीति.

निष्कर्ष,

तो, दोस्तों इस लेख में आपने राजनीति विज्ञान के जनक कौन है (Rajniti Vigyan Ke Janak Kaun Hai) और राजनीति के बारे में जानकारी प्राप्त की जैसे कि :

अरस्तू को राजनीति विज्ञान (Political Science) के जनक कहा जाता है जिन्होंने इस विषय पर अनेकों रचनाएं की.

हम उम्मीद करते हैं आपकों राजनीति विज्ञान के जनक एवं पिता किसे कहा जाता है और उनसे संबंधित बातों के अच्छे से समझ गए होंगे.

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