हरित क्रांति क्या है? जानिए इसका इतिहास

क्या आपकों पता है हरित क्रांति क्या है और इसका मतलब क्या होता है? कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने हरित क्रांति (Green Revolution) का नाम जरूर सुना होगा.

किसी भी क्षेत्र में बदलाव करने से उसी विकास में फर्क़ जरूर पड़ता है जैसे कि कृषि के क्षेत्र में हुए शोध विकास, तकनीकि परिवर्तन एवं अन्य कदमों की श्रृंखला से पूरी दुनिया में हरित क्रांति की शुरुआत हुई.

यदि आप हरित क्रांति (Harit Kranti) के बारे में समझना चाहते हैं और इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो इस लेख को पूरा जरूर पढ़े.

हरित क्रांति क्या है परिभाषा (2024 में)

हरित क्रांति क्या है

हरित क्रांति (Green Revolution) विश्वभर में आधुनिक उपकरणों और तकनीकों को शामिल करके कृषि उत्पादन बढ़ाने की प्रक्रिया का एक दौर को कहा जाता है.

यानी हरित क्रांति का संबंध कृषि उत्पादन से है. विश्वभर में कृषि के क्षेत्र में आधुनिक तरीकों और तकनीकों का उपयोग पहले नहीं होता था जिसके वज़ह से कृषि उत्पादन में वृद्धि नहीं होती थी.

पहले कई देशों में खाद्यान की अपर्याप्तता होना एक बहुत बड़ी समस्या थी क्योंकि देश में जनसंख्या बढ़ती जा रही थी लेकिन परंपरागत कृषि से उत्पादन कम होती थी. इन सभी देशों में भारत की समस्या भी कुछ ऐसा ही था.

इसलिए इन सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए यह जरूरी था कि विश्वभर में कृषि के क्षेत्र में आधुनिक तरीकों और तकनीकों को अपनाकर कृषि उत्पादन में तेजी लाया जाए जैसे कि अधिक उपज देने वाले किस्म के बीज, सिंचाई की सुविधा, ट्रैक्टर, कीटनाशकों और उर्वरकों का उपयोग करना.

इन्हीं सभी को देखते हुए, खाद्य उत्पादन की तुलना में तेजी से बढ़ती जनसंख्या ने उपज बढ़ाने के लिए कठोर और तत्काल कार्रवाई की मांग हुई जो हरित क्रांति (Green Revolution) के रूप में आई और इस प्रकार विश्वभर में हरित क्रांति की शुरुआत हुई.

क्रांति काल 1950 – 1960 के दशक के अंत में
विश्व में हरित क्रांति के जनकनॉर्मन बोरलॉग
भारत में हरित क्रांति के जनकएम.एस. स्वामीनाथन
उद्देश्यउच्च उपज वाली किस्म (HYV) का उपयोग, सिंचाई सुविधाओं का उन्नयन और अधिक प्रभावी उर्वरकों का उपयोग

हरित क्रांति के पहलू

  1. आधुनिक तरीकों और तकनीकों का उपयोग
  2. अधिक उपज देने वाली किस्में (HYV) का उपयोग
  3. कृषि के क्षेत्र में मशीनीकरण
  4. सिंचाई की सुविधा
  5. कीटनाशकों और उर्वरकों का उपयोग
  6. भूमि जोत का समेकन

भारत में हरित क्रांति (Green Revolution in India)

हमारे देश में सन् 1960 तथा 1980 के बीच के समय में कृषि उत्पादन बढ़ाने की प्रक्रिया का वह दौर हरित क्रांति के नाम से जाना जाता है.

वर्ष 1965 में, भारत में हरित क्रांति की शुरुआत एम. एस. स्वामीनाथन के द्वारा की गई थी. हमारे देश में हरित क्रांति के कारण कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई और राष्ट्रीय अनाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिली.

देश में विशेषकर हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादन में वृद्धि सबसे अधिक हुई, जहां गेहूं और चावल की पैदावार में तेजी से वृद्धि हुई थी.

वर्ष 1967-68 तथा वर्ष 1977-78 के बीच देश में हुई हरित क्रांति के कारण भारत को खाद्यान्न की कमी वाले देश की श्रेणी से निकालकर विश्व के अग्रणी कृषि देशों की श्रेणी में परिवर्तित कर दिया.

भारत में हरित क्रांति काल1967 से 1978 तक
जनक (भारत)एम. एस. स्वामीनाथन

दुनिया भर में हरित क्रांति (Green Revolution Around the World)

हरित क्रांति की शुरुआत मेक्सिको में होने के बाद दुनिया भर के कई देशों में भी इसका प्रभाव पड़ा जैसे ही की भारत, चीन और अफ़्रीका.

आइए देखें है हरित क्रांति कितने स्थानों पर हुई और इसके क्या प्रभाव हुए.

1. मेक्सिको (Mexico)

मेक्सिको को हरित क्रांति का ‘जन्मस्थान’ और ‘कब्रिस्तान’ कहा जाता है. कहा जाता है कि बीसवीं शताब्दी के दौरान दो क्रांति ऐसे हुए जिसने ग्रामीण मेक्सिको को बदल दिया : मैक्सिकन क्रांति (1910-1920) और हरित क्रांति (1950-1970).

इसका नेतृत्व मैक्सिकन सरकार ने 1943 में मैक्सिकन राष्ट्रपति मैनुअल एविला कैमाचो के राष्ट्रपति के आदेश और वित्त के तहत किया था.

मेक्सिको में हरित क्रांति के कारण देश में कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई और खाद्य आत्मनिर्भरता की समस्या में काफी मदद मिली.

2. चीन (China)

चीन में अधिक जनसंख्या बढ़ती जा रही थी उसके मुकाबले परंपरागत कृषि से उत्पादन कम होती थी. इसलिए खाद्य उत्पादन में वृद्धि चीनी सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता थी.

इसी कारण से चीनी सरकार ने कृषि उत्पादन के लिए कई नीतियां लाई जिससे किसानों को तकनीकी सहायता, सस्ती HYVs, उर्वरक और कीटनाशकों, आदि की सुविधाएं प्रदान हुई.

इससे चीन में आवश्यक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिली और यह आत्मनिर्भर हो पाया.

3. अफ्रीका (Africa)

अफ्रीका में हरित क्रांति को सफलतापूर्वक प्रस्तुत करने के बावजूद भी कई कारणों की वज़ह से इसे अन्य देशों की तुलना में क्रांति की स्थापना को असफल बना दिया.

जैसे कि देश में उच्च भ्रष्टाचार दर, असुरक्षा, बुनियादी ढांचे की कमी और सरकार की ओर से सामान्य इच्छाशक्ति की कमी थी.

इन कारणों के अलावा, अफ्रीका देश में अधिक गर्मी, सिंचाई के लिए पानी की कमी, मिट्टी के प्रकार विभिन्न होना, आदि पर्यावरणीय कारण भी थे, जिससे अफ्रीका में हरित क्रांति असफल हो गई.

हरित क्रांति के इतिहास (History of Green Revolution in Hindi)

8 मार्च 1968 को “हरित क्रांति” शब्द का प्रयोग पहली बार एक भाषण में यू.एस. एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) के प्रशासक विलियम एस. गौड (William S. Gaud) द्वाराकिया गया था.

हरित क्रांति के जनक अमेरिकी वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलॉग को कहा जाता है जिन्होंने 1940 के दशक में मेक्सिको में अनुसंधान करना शुरू किया और गेहूं की नई रोग प्रतिरोधक उच्च उपज वाली किस्में विकसित की.

नॉर्मन बोरलॉग : हरित क्रांति के जनक

हरित क्रांति ने औद्योगिक खाद्य उत्पादन प्रणालियों का उपयोग करके मेक्सिको ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को बदल दिया. साथ ही नागरिकों की आवश्यकता से अधिक गेहूं का उत्पादन करने में सक्षम हुआ, जिससे वे 1960 के दशक तक गेहूं का निर्यातक बन गया था.

1950 और 1960 के दशक में, मेक्सिको में हरित क्रांति सफल होने के कारण इसकी प्रौद्योगिकियां दुनिया भर में फैल गई जिससे कई देशों ने कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया.

जैसे कि 1940 में अमेरिका ने गेहूं का उत्पादन बहुत कम किया वही हरित क्रांति की आधुनिक तरीकों और तकनीकों का उपयोग कर के 1950 में यह आत्मनिर्भर हो गया और 1960 के अंत तक एक निर्यातक बन गया था.

इन्हीं सभी को देखते हुए दुनिया भर में कई देश हरित क्रांति की प्रौद्योगिकियां का उपयोग अधिक खाद्य उत्पादन के लिए करने लगे.

जैसे कि 1960 में, भारत अपनी तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारण अकाल के कगार पर था. तब हरित क्रांति की शुरुआत एम एस स्वामीनाथन ने भारत की.

उस समय भारत में चावल की एक नई किस्म IR8 को विकसित किया गया जो सिंचाई और उर्वरकों के साथ उगाए जाने पर प्रति पौधा अधिक अनाज पैदा करता था. यही कारण है कि आज भारत दुनिया के अग्रणी चावल उत्पादकों में से एक है.

भारत के बाद कई एशियाई देशों ने हरित क्रांति की प्रौद्योगिकियां का उपयोग किया और अपने देश में अनाज के मामले में आत्मनिर्भर हो गए जैसे कि चीन.

हरित क्रांति के फायदे और नुकसान (Advantages and Disadvantages of Green Revolution)

चलिए जानते हैं हरित क्रांति के फायदे और नुकसान :

हरित क्रांति के फायदे

  1. हरित क्रांति के कारण देश अनाज उत्पादन में आत्म-निर्भर हो गया.
  2. इससे राष्ट्रीय अनाज की पर्याप्त सुरक्षित भंडार इकट्ठा हो गया.
  3. हरित क्रांति से देश के किसान के जीवन में बदलाव और कृषि में उनका लाभ बढ़ना.
  4. भुखमरी से बचाव.
  5. अनाज की पर्याप्त सुरक्षित भंडार से सूखे जैसी स्थितियों का सामना आसानी से किया गया.

हरित क्रांति के नुकसान

  1. इससे मिट्टी की गुणवत्ता में कमी हुई.
  2. अधिक रासायनिक उर्वरकों, कृत्रिम शाकनाशियों के उपयोग से पर्यावरण तथा मिट्टी प्रदूषण में वृद्धि हुई.
  3. जिससे हेल्थ प्रॉब्लम होती है.
  4. साथ ही इसके अत्यधिक उपयोग से मिट्टी का क्षरण (erosion of soil) भी हुआ है.

हरित क्रांति क्या होती है?

हरित क्रांति एक कृषि सुधार थी जिसने 1950 से 1960 के दशक के अंत तक विश्वभर में फसलों के उत्पादन में वृद्धि की.

भारत में हरित क्रांति की शुरुआत किसने की?

भारत में हरित क्रांति की शुरुआत एम एस स्वामीनाथन ने की थी.

हरित क्रांति किस देश ने शुरू की?

मेक्सिको दुनिया का पहला देश था जिसने हरित क्रांति की शुरुआत की थी.

हरित क्रांति क्यों शुरू हुई ?

अनाज की कमी के कारण भारत एवं दुनिया भर में हरित क्रांति की शुरुआत हुई.

निष्कर्ष,

तो, दोस्तों इस लेख में आपने सीखा हरित क्रांति क्या है (Harit Kranti Kya Hai) और इसकी शुरूवात क्यों और किसने की?

हरित क्रांति, विश्वभर में कई देशों के लिए उपलब्धि थी जिसके कारण परंपरागत कृषि से उत्पादन में सुधार हुई और राष्ट्रीय अनाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद मिली थी.

हम उम्मीद करते हैं आपकों हरित क्रांति क्या होती है और इससे संबंधित अन्य बातों को आप समझ गए होंगे. दोस्तों, यदि यह लेख आपकों पसंद आई है तो कृपया इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें.

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